Yamuna River Front Development in Noida

Yamuna River Front to be developed in Noida city

अब यमुना के तीरे टहलने में आएगा मजा
5 Dec 2010, 0400 hrs IST
विनोद शर्मा ॥ नोएडा
पब्लिक की तरफ से पार्क के आस पास पर्यावरण बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में लड़ी गई लड़ाई का

असर सुखद होगा। नोएडा सिटी में यमुना का किनारा इतना खूबसूरत बनेगा कि पूरे 1376 किलोमीटर लंबे रूट पर शायद ही इस तरह की तस्वीर दिखाई दे। यहां कुल तीन लाख 30 हजार वर्ग मीटर के 75 पर्सेंट हिस्से में हरियाली होगी। इसके साथ ही 75 पर्सेंट में भी पचास पर्सेंट में घने वृक्ष होंगे। बाकी 25 पर्सेंट एरिया को लैंड स्केपिंग व ग्रीन घास के जरिए सुंदर बनाने का प्लान है। इन सबसे ज्यादा सुखद पहलू यह है कि यमुना को साफ सुथरा रखने की जिम्मेदारी अब ज्यादा बढ़ गई है। इस प्लान में सीईसी की सिफारिशों को भी लागू करना जरूरी होगा। इसमें दिल्ली में यमुना में गिरने वाले सभी नालों को बंद कर वहां ट्रीटमेंट प्लांट बनाकर देने का काम तेजी से करना होगा। यह सब वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत ओखला बर्ड सेंचुरी के लिए करना होगा। फिलहाल यमुना में पानी का प्रदूषण इतना ज्यादा है कि पक्षी विहार आने से विदेशी भी कतराते रहते हैं और जो आते हैं वे नाक पर रूमाल रख कर निकलते हैं।


सेक्टर 14 की आरडब्ल्यूए की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई एक याचिका में यमुना पानी के प्रदूषण की तस्वीर पेश करते हुए बताया गया था कि जब यमुना का पानी दिल्ली में वजीराबाद के निकट एंट्री करता है तब उसकी कॉली रिवर वैल्यू 500 मिलियन लीटर है। यानी इस पानी को पिया जा सकता है। यही पानी जब पूरी दिल्ली पार कर ओखला बैराज तक पहुंचता है तब इसकी कॉली रिवर वैल्यू दो लाख दस हजार मिलियन लीटर हो जाती है। यहां यह पानी पीकर मछलियां तक मर जाती हैं। इसके अलावा यह पर्यावरण की बेहद खतरनाक तस्वीर पेश करता है। शाहदरा डे्रन के मामले में सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर करने वाले फोनरवा के पूर्व अध्यक्ष सुशील अग्रवाल का कहना है कि कायदे से यमुना के पानी का रंग बदलने की जिम्मेदारी दिल्ली जल बोर्ड की है। वे कहते हैं कि यमुना एक्शन प्लान के तहत लगभग तीन हजार करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इसके बाद भी यमुना को प्रदूषण मुक्त नहीं किया गया। कम से कम ऐसी तस्वीर बनाना जरूरी है जिसमें नदी साल भर बहती रहे। यहां तो यमुना रीवर सीवर में तब्दील हो गई है।
न्यूनतम बहाव लेवल तय होना जरूरी
चार साल से यमुना बचाओ आंदोलन चला रहे सामाजिक कार्यकर्ता मनोज मिश्रा का कहना है कि दिल्ली में यमुना नदी रेक्टेंगल सीवेज पंप बन गई है। यमुना को बचाने का सारा दारोमदार दिल्ली से लगभग ढाई सौ किलोमीटर दूर हथिनी कुंड के पास है। वहां से पानी साल भर इस तरह छोड़ा जाए ताकि यमुना में सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार सरफेस लेवल दस क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड का बहाव हो।
नदी की तरफ न हो निर्माण
यमुना बचाओ आंदोलन से जुड़े मनोज मिश्रा यमुना नदी के किनारे से इलाहाबाद तक घूम आए हैं। उनका सुझाव है कि यमुना एक्सप्रेस पर नदी की तरफ किसी तरह का निर्माण कार्य नहीं होना चाहिए। इस पर यूपी गवर्नमेंट को जल्द सोचना चाहिए। नदी के खादर क्षेत्र पर कहीं माफिया की तो कहीं बड़े बिल्डरों की निगाहें हैं।
धारा 51 ए ( जी ) पर हो अमल
पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करने वाले कमोडोर लोकेश बत्रा कहते हैं कि घनी हरियाली और बहती नदी देखना कौन नहीं चाहता। हमारे संविधान की धारा 51 ए ( जी ) में साफ कहा गया है कि सभी के जीवन को बचाने के लिए जंगल , झील , नदी व वन्य जीव को संरक्षित करना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है।
ओखला बर्ड सेंचुरी के पास पानी के पलूशन का हाल
लेवल पलूशन के स्टेंडर्ड वास्तविक तस्वीर
प्रति लीटर ( बाथिंग क्वॉलिटी )
पानी में ऑक्सिजन की मात्रा पांच एमजी 0.1 एमजी
फेसियल केलिफार्म नंबर 0.5 मिलियन लीटर 210 मिलियन लीटर
बीओडी 3 एमजी 36 एमजी
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यमुना के पड़ाव एक नजर में
यमुनोत्री से हथिनी कुंड तक – 172 किलोमीटर
हथिनी कुंड से वजीराबाद – 224 किलोमीटर
वजीराबाद बैराज से ओखला बैराज – 22 किलोमीटर
ओखला बैराज से चंबल नदी तक – 490 किलोमीटर
चंबल से गंगा संगम तक – 468 किलो मीटर
Source: http://navbharattimes.indiatimes.com/delhiarticleshow/7044241.cms

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