Noida – Flagbearer of development in NCR

– अगले 5 साल में इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होंगे 5 हजार करोड़ रुपये
– ट्रांसपोर्ट, एजुकेशन, मेडिकल और बिजली का ए क्लास इन्फ्रास्ट्रक्चर

विनोद शर्मा ॥ नोएडा
एनसीआर के शहरों में नोएडा ने अपनी खास पहचान बनाई है। यहां आने के बाद अब लोग इसे दिल्ली के साथ ही देश के सबसे बेहतरीन शहरों की कैटिगरी में शुमार करते हैं। यहां ट्रांसपोर्ट, एजुकेशन, मेडिकल, सड़कें, बिजली, पार्क और लाइफस्टाइल के वे सभी संसाधन मौजूद हैं, जो किसी भी शहर के लिए जरूरी हैं। यमुना और हिंडन नदी के बीच 20 हजार 316 हेक्टेयर जमीन पर बसा नोएडा का अस्तित्व 17 अप्रैल 1976 को तब आया, जब यूपी गवर्नमेंट ने युवा नेता स्व. संजय गांधी के सपनों को साकार करने के लिए ओखला की तर्ज पर यमुना के दूसरे किनारे पर न्यू ओखला औद्योगिक एरिया का नोटिफिकेशन किया। मास्टरप्लान 2031 के तहत नोएडा की आबादी कुल 25 लाख के करीब होगी। इसी के लिहाज से यहां डिवेलपमेंट का प्लान बनाया जा रहा है।

कैसे हुई प्रोग्रेस – 1976 में नोएडा ने सबसे पहले यहां के 37 गांवों को नोटिफाई किया था। इसके बाद 15 नए गांवों को शामिल किया गया। 1990 आते-आते हिंडन और यमुना के बीच बसे कुल 81 गांवों को नोटिफाई कर दिया गया। एक तरफ राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 24 और दूसरी तरफ अब दिल्ली से आगरा की तरफ तैयार होती राह में डिवेलपमेंट की रफ्तार यूपी के एक सिरे से दूसरे सिरे तक जाती दिख रही है। इंडस्ट्री के साथ-साथ इंस्टिट्यूशनल, एजुकेशनल हब, फिल्म सिटी और कमर्शल स्पॉट शहर में हो रही तरक्की की कहानी लिख रहे हैं। सरकार को नोएडा से मिल रहे रेवेन्यू की बात की जाए तो अकेले इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से सेंट्रल गवर्नमेंट को लगभग 2200 करोड़, कमर्शल टैक्स डिपार्टमेंट से 2400 करोड़, बिजली से 1400 करोड़, स्टांप व रजिस्ट्रेशन से 800 करोड़, ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट से लगभग 50 करोड़ का राजस्व मिल रहा है। अकेले नोएडा शहर को मैनेज करने वाली नोएडा अथॉरिटी का सालाना बजट 5 हजार करोड़ के पार पहुंच चुका है। यहां इस समय इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खास फोकस चल रहा है। अंडरपास, फ्लाईओवर, फुट ओवरब्रिज, नए पुल, सबस्टेेशन और ट्रांसपोर्ट सिस्टम सुधारने के लिए अगले 5 वर्षों में लगभग 5 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान किया गया है।
डिवेलपमेंट की नजर में लोकेशन – आने वाले दिनों में नोएडा के डिवेलपमेंट को 3 भागों में जाना जाएगा। पहला पुराना नोएडा, दूसरा यमुना किनारे नोएडा और तीसरा हिंडन किनारे नोएडा। इन सबके बीच एफएनजी और नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे एक ऐसी तस्वीर बनाएगा, जिससे होकर जब देश-विदेश के लोग नोएडा को निहारेंगे तो कह उठेंगे कि वाकई यह एक ऐसा शहर है जो काफी प्लानिंग और मशक्कत से बसा है। इसमें इन दिनों सांस्कृतिक रंगों को घोलने की तैयारी चल रही है। इसके तहत पहली बार यूपी टूरिजम ने हर साल दीपावली के आस-पास शिल्पोत्सव के रूप में 10 दिन का इंटरनैशनल लेवल के टे्रड फेयर की शुरुआत की है। इसे दुबई फेस्टिवल की तर्ज पर डिवेलप किया जा रहा है।
कई मायनों में नोएडा की पहचान – नोएडा शहर में कई ऐसी धरोहर हैं , जो इसे न केवल उत्तर भारत के अन्य शहरों से अलग बनाती हैं , बल्कि इसके महत्व को भी बढ़ाती हैं। देश का पहला शुष्क बंदरगाह ( एसईजेड ) नोएडा में बना था , इसमें 300 से ज्यादा ऐसी यूनिटें लगी हैं , जो शत – प्रतिशत निर्यात करती हैं। उत्तर भारत की फिल्म सिटी नोएडा में है , जो अब मीडिया हब के रूप में भी पहचानी जाती है।

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