GNoida: Long pending project list

क्या लंबित परियोजनाओं के बहुरेंगे दिन?

Feb 10, 08:53 pm

धर्मेद्र चंदेल, ग्रेटर नोएडा

योजनाएं बनाने में अग्रणी, समयबद्ध तरीके से पूरा करने में फिसड्डी। गिनती दुनिया के हाईटेक शहरों में, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और। स्थापना के 20 वर्ष बाद भी कई महत्वकांक्षी व जनहित से जुड़ी परियोजनाएं अधूरी हैं। धरातल पर कसरत के बजाए कागजों में ही काम चल रहा है। करोड़ों रुपए निर्माण कार्य पर खर्च किए जा चुके हैं, मगर नतीजा ढाक के तीन पात है। मुख्यमंत्री मायावती के इस महीने जनपद में विकास कार्यो का निरीक्षण करने की उम्मीद है। लोगों की जुबां पर यही सवाल है कि मुख्यमंत्री के आने से क्या लंबित चल रही परियोजनाओं की किस्मत खुलेगी?

लंबित परियोजनाओं का सूरत-ए-हाल

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट

योजना बनी : वर्ष 2003 में

पूरा करने का लक्ष्य : वर्ष 2007

ताजा स्थिति : निर्माण जारी

कब पूरा होगा काम : वर्ष 2012 तक उम्मीद

ग्रेटर नोएडा के सेक्टरों से प्रतिदिन 40 एमएलडी सीवर निकलता है। अगले 5 वर्ष में बढ़कर यह 140 एमएलडी हो जाएगा। ट्रीटमेंट करने के लिए अभी तक सीवेज प्लांट नहीं है। प्राधिकरण वर्षो पुरानी प्रणाली से सीवेज ट्रीट कर यमुना में डालता है। पहले कोट स्कैप नाले के पास इसे बनाया जाना प्रस्तावित था। निर्माण पर 12 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए। जमीन में दलदल निकलने से स्थान बदलना पड़ा। अब कासना गांव के पास नौ एकड़ जमीन पर 150 करोड़ रुपए की लागत से प्लांट बनाया जा रहा है।

दादरी रेलवे ओवर ब्रिज

योजना बनी : वर्ष 2000 में

काम की गति : धीमी

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2007 में 2009 तक

काम पूरा करने की घोषणा की।

अड़ंगा : किसानों ने एक किलोमीटर भूमि पर नहीं दिया कब्जा

रेलवे ओवर ब्रिज के निर्माण के लिए 45 करोड़ रुपए का बजट बनाया जा चुका है। दस वर्ष का समय बीतने के बावजूद पुल का निर्माण पूरा नहीं हुआ है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में वाहन गुजरते हैं। रेलवे क्रासिंग पर अधिकांश समय फाटक लगा होने से वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। नोएडा, दादरी, बुलंदशहर, अलीगढ़ व गाजियाबाद जाने वाले यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।

बोड़ाकी रेलवे स्टेशन

योजना बनी : वर्ष 2004 में

काम पूरा करने का लक्ष्य : निर्धारित नहीं

महत्व : रेल यात्रा के लिए नहीं जाना पड़ेगा दिल्ली व गाजियाबाद

बोड़ाकी रेलवे स्टेशन को विकसित करने की बात स्थापना के समय से ही चल रही है। निर्माण के लिए तीन हजार करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान भी कर दिया गया है, लेकिन उत्तर प्रदेश व केंद्र सरकार के बीच समझौता न होने के कारण स्टेशन का निर्माण शुरू ही नहीं हो पाया। रेल से यात्रा करने वाले लोगों को दिल्ली व गाजियाबाद जाकर ट्रेन पकड़ने में भारी असुविधा होती है।

गंगाजल आपूर्ति

योजना बनी : वर्ष 2003

काम पूरा करने का लक्ष्य : 2009 में

पूरा न होने का कारण : प्राधिकरण की हीलाहवाली

अब लक्ष्य : वर्ष 2012

पेयजल की दिक्कत दूर करने के लिए गंगाजल की आपूर्ति की लाइन बिछाने का काम अभी दहरा झाल तक ही पूरा हुआ है। दहरा से ग्रेटर नोएडा पानी की पाइप लाइन के लिए विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जा रही है। आंतरिक सप्लाई का निर्माण 40 फीसदी हुआ है।

नाइट सफारी

योजना बनी : वर्ष 2004 में

लक्ष्य : निर्धारित नहीं

ताजा स्थिति : कागजों में चल रही कार्रवाई

ग्रेटर नोएडा में 350 एकड़ जमीन पर देश की पहली व विश्व की चौथी नाइट सफारी प्रस्तावित है। 800 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है। बीते तीन वर्षो में प्रक्रिया पूरी करने पर करीब चार हजार करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण यह कहकर शुरू नहीं किया जा रहा कि प्राधिकरण के पास पैसा नहीं है।

बॉक्स

तकनीकी दिक्कतों के चलते हुई देरी : सीईओ

प्राधिकरण के सीईओ रमा रमन का कहना है कि सभी परियोजनाओं में तकनीकी दिक्कत थी। नाइट सफारी को छोड़कर बाकी का तेजी से काम चल रहा है। एक से दो वर्ष के अंदर सभी परियोजनाएं पूरी हो जाएंगी। बोड़ाकी रेलवे स्टेशन के निर्माण केंद्र व प्रदेश सरकार के स्तर पर समझौता होना है। अनुबंध होते ही निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_7303630_1.html

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