Noida Extension/ Yamuna Eway Land Acquisition issues

Update: 14 May 2011

While farmers agitation/High Court land acquisition denoticification are unfortunate events for GNoida/YEIDA, there could be a some opportunity for properties in legal areas in Ghaziabad and Noida in short term because of following

  1. In recent times, Yamuna Expressway plots had stolen thunder as far as plots in NCR are concerned. It now appears that some of the land on YE townships/sectors may not be in possession of Govt. It would be an understatement that the prices on YE were crazy (15-30 K psy) for a region that cannot boast about any nearby school/hospital/jobs in the vicinity, but that did not deter investors to pour funds in the region. YE plots are a good 100 km return drive from Noida/DND. Considering the costs of toll @ Rs1.5 per km and petrol prices where they are now, it was a non-starter from day-one. A small needle can really puncture bloated area if not supported by genuine demand.
  2. At the same time genuine plots of GNoida sectors (Eta/Site-C/Ansal Golf Link 2) and Ghaziabad (Wave City NH-24, RajNagar Ext)) begged for attention as their prices are not only less than YE but they can boast of better existing infrastructure/Schools/Jobs/metro.
  3.  The flats in Noida Ext were sold because they were cheapest in NCR. However, now legitimate areas in Noida (Sector 7x, eway), Ghaziabad (NH-24, NH-58), Crossing Republic and RajNagar Ext could see a rebound and genuine demand.
  4. The NE areas where high court has denotified were never given possesion by authority to builders. This means if the registry has been done for the land by the builder, it is safe. Some of the better builders in Noida Ext impacted by denotification are planning to re-allocate flats in other legal areas wherever feasible as per their feelers.
  5. The days of reasonably-priced plots and flats may be getting over. The land aquisition process would now become tougher and costly process at the expense of development and land-less service middle class.All political parties are bending over backwards to woo the farmers. No one really thinks about a huge middleclass who aspires to have reasonably-priced homes. The future trend would be that the builders have to buy their land directly from villagers (not through public service garb) at the market rate.

We suggest to tread with caution till UP election scheduled in May/June 2012. Happy investing

नोएडा एक्सटेंशन में अधर में लटके 10 हजार फ्लैट्स!

Posted on May 15, 2011 at 07:21pm IST | Updated May 15, 2011 at 08:58pm IST

नोएडा। नोएडा एक्सटेंशन हजारों लोगों के लिए बड़ी टेंशन बन गया है। शाहबेरी गांव की जमीन लौटाने के हाई कोर्ट के आदेश और बिल्डरों के लुभावने वादों की पोल खुलने के बाद इलाके में सन्नाटा पसरा है। जिन लोगों ने यहां फ्लैट बुक कराए हैं अब उन्हें इस बात की फिक्र सता रही है कि क्या उनके पैसे वापस मिलेंगे। किसानों के मुताबिक अथॉरिटी ने शाहबेरी गांव की जमीन का अधिग्रहण ये कहकर किया था कि यहां विदेशी कंपनी लगाई जानी है लेकिन अथॉरिटी ने बिल्डरों की मिलीभगत से ये जमीन हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए अलॉट कर दी।

जानकारी के मुताबिक ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने यहां चार बिल्डरों आम्रपाली, सुपरटेक, महागुन और गौर संस को जमीन अलॉट की थी। लेकिन शाहबेरी गांव के 156 एकड़ जमीन के अधिग्रहण पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाते हुए जमीन आवंटन को रद्द कर दिया है। हाई कोर्ट ने जिस जमीन पर सवाल उठाया है उसमें आम्रपाली का स्मार्ट सिटी, सुपरटेक का इको विलेज फेज-टू का कुछ हिस्सा है। इनके अलावा महागुन ने अपने फ्यूचर प्रॉजेक्ट्स के लिए इसी गांव में जमीन ले रखी है और गौर संस के टाउनशिप का कुछ हिस्सा भी शाहबेरी में पड़ता है। ऐसे में यहां तैयार हो रहे करीब 10 हजार फ्लैट का निर्माण अधर में लटक गया है।

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जाहिर है इस मामले के सामने आने के बाद ग्राहक खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। वहीं बिल्डरों का दावा है कि लोगों का पैसा नहीं फंसेगा। वो या तो मकान दूसरी जगह देने की पेशकश कर रहे हैं या फिर पैसे जल्द ही वापस करने को कह रहे हैं। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी शाहबेरी गांव के किसानों को ज्यादा मुआवजा देकर जमीन देने के लिए मनाने की कोशिश में जुटी है। लेकिन ये कोशिश पिछले एक महीने से की जा रही थी और इस बीच हाईकोर्ट के फैसले के बाद जमीन का ये विवाद लंबा खिंचता नजर आ रहा है।

नोएडा एक्सटेंशन के शाहबेरी गांव के किसान जमीन अधिग्रहण के विरोध में यूं ही कोर्ट नहीं चले गए। इसकी बड़ी वजह है जमीन के बदले मिला मुआवजा। नोएडा एक्सटेंशन में जमीन देने वाले किसानों को अथॉरिटी से जो कीमत मिली उससे दस गुना ज्यादा कीमत नोएडा एक्सटेंशन से सटे गाजियाबाद में क्रॉसिंग रिपब्लिक नाम की टाउनशिप के लिए जमीन देने वाले किसानों को मिली। फर्क सिर्फ इतना था कि गाजियाबाद के इन किसानों ने अपनी जमीन सीधे बिल्डर को बेची थी।

गाजियाबाद के क्रॉसिंग रिपब्लिक इलाके में बिल्डरों के लिए सरकार ने जमीन का अधिग्रहण नहीं किया। बिल्डरों ने किसानों से जमीन खरीदने के लिए सीधे-सीधे बाजार भाव में डीलिंग की। ऐसे में डुन्डाहेड़ा गांव के कुछ किसानों ने तो क्रासिंग रिपब्लिक को अपनी जमीन 17 हजार प्रति वर्ग मीटर से ज्यादा की कीमत पर बेची। जिसके बाद नोएडा एक्सटेंशन के किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं क्योंकि यहां भी वही बिल्डर हाउसिंग सोसायटी बना रहे हैं। जिन्होंने क्रॉसिंग रिपब्लिक में इमारतें खड़ी की।

मालूम हो कि नोएडा एनसीआर में आए प्रॉपर्टी बूम के चलते लोग अपने घर का सपना फ्लैट खरीद कर पूरा तो कर रहे हैं लेकिन इसके साथ की प्रॉपर्टी से जुड़े फर्जीवाड़े के मामलों में भी बाढ़ सी आ गई है। पिछले एक साल में आधा दर्जन से भी अधिक नामी गिरामी बिल्डरों के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले या तो थानो में या फिर कोर्ट में पहुंच चुके हैं।

http://khabar.ibnlive.in.com/news/53042/3/19

नए फॉर्म्युले से खत्म होगी एक्सटेंशन की टेंशन!
15 Apr 2010, 0115 hrs IST,नवभारत टाइम्स

ग्रेटर  नोएडा।। जमीन अधिग्रहण प्रतिरोध आंदोलन के विरोध-प्रदर्शनों का असर अब दिखने लगा है। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने किसानों की समस्याओं को हल करने के लिए एक नया फॉर्म्युला तैयार किया है। इस फॉर्म्युले पर विमर्श के लिए अथॉरिटी के सीईओ ने किसानों को गुरुवार को वार्ता के लिए बुलाया है।

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सूत्रों के अनुसार सरकार ने अथॉरिटी और प्रशासनिक अफसरों को एक्सटेंशन के टेंशन को जल्द खत्म करने के निर्देश दिए हैं। अगर बातचीत से बात नहीं बनी तो अधिकारी किसानों के पास जाकर उन्हें मनाने की कोशिश करेंगे। सरकार की मंशा के मद्देनजर अफसरों ने किसानों से संपर्क करना शुरू कर दिया है।

ग्रेनो अथॉरिटी के सीनियर अफसरों ने एसी कमरों से निकलकर गांवों का दौरा करना शुरू कर दिया है। मंगलवार को अथॉरिटी के कई अफसर किसानों की आबादी और अधिग्रहण की समस्या के निपटारे के संबंध में बातचीत के लिए गांव शाहबेरी पहुंचे। उन्होंने गांव में अधिग्रहण से मुक्त की गई आबादी की लिस्ट लगाई। अफसरों के दावे और वादों पर विचार करने के लिए बुधवार को शाहबेरी में किसानों ने पंचायत की।

वहीं, एडीएम (प्रशासन) ओ. पी. आर्य और एसपी देहात ने बुधवार को सूरजपुर स्थित एसपी ऑफिस में जमीन अधिग्रहण प्रतिरोध आंदोलन के संयोजक सरदाराम भाटी व प्रवक्ता डॉ. रूपेश वर्मा के साथ मीटिंग की। मीटिंग में एडीएम ने उन्हें अथॉरिटी के सीईओ के हवाले से एक नया फॉर्म्युला तैयार होने की जानकारी दी। डॉ. रूपेश वर्मा ने बताया कि सीईओ ने किसानों को वार्ता के लिए गुरुवार को दो बजे अथॉरिटी ऑफिस बुलाया है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र की सभी किसान कमिटियों को इसकी सूचना दे दी गई है। अगर किसान अथॉरिटी के फॉर्म्युले पर राजी हो गए तो उनका आंदोलन समाप्त हो जाएगा।

http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/5805636.cms

सूरजपुर का अधिग्रहण भी रद्द

हिन्दुस्तान टीम, इलाहाबाद/नोएडाFirst Published:14-05-11 12:56 AM

Last Updated:14-05-11 12:56 A

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगातार दूसरे दिन ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी को झटका दिया। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को गौतमबुद्धनगर जिले की दादरी तहसील में सूरजपुर गांव की 72 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण भी रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति सुनील अंबवानी एवं न्यायमूर्ति काशीनाथ पांडेय की खंडपीठ ने आरपी इलेक्ट्रानिक्स व अन्य की 42 याचिकाओं को मंजूर करते हुए अधिग्रहण को रद्द किया।

कोर्ट ने राज्य सरकार को नए सिरे से अधिग्रहण की अधिसूचना जारी करके जमीन मालिकों को सुनवाई का मौका देते हुए उनकी आपत्तियां निस्तारित करने की  भी छूट दे दी है। गौरतलब है कि गुरुवार को भी हाईकोर्ट ने ग्रेटर नोएडा एक्सटेंशन के लिए शाहबेरी गांव की 159 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण रद कर दिया था।

हाईकोर्ट में याचियों ने कहा कि राज्य सरकार ने अधिग्रहण को अर्जेट बताते हुए उन्हें पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 15 जनवरी व 28 अगस्त 2009 की अधिसूचनाओं को रद्द करते हुए कहा कि ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक विकास का प्रस्ताव दो वर्षो तक लंबित रहा। इस दौरान राज्य सरकार सिर्फ प्रत्यावेदन पर विचार करती रही। इस प्रकार अधिग्रहण की पूरी कार्रवाई मनमानीपूर्ण रही।

नहीं हुआ आवंटन
सूरजपुर में जमीन अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जनवरी 2009 में शुरू हुई थी। वर्ष के अंत तक ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने 48 हेक्टेयर जमीन पर किसानों से कब्जा भी ले लिया था। अथॉरिटी का इस जमीन के अधिग्रहण का उद्देश्य औद्योगिक विकास था। हालांकि कब्जा लेने के बाद भी अथॉरिटी कोई स्कीम लांच नहीं कर सकी जिससे जमीन का आवंटन नहीं हो सका।

http://www.livehindustan.com/news/desh/today-news/article1-story-39-329-171101.html

उखड़ने लगे तंबू, गायब हुए बुकिंग बूथ

नोएडा वरिष्ठ संवाददाता। शुक्रवार को नोएडा एक्सटेंशन के बुकिंग बूथ खाली थे। कई जगहों पर कोर्ट के फैसले से प्रभावित प्रोजेक्ट के तंबू उखड़ गए। बुकिंग करने वाले गायब थे। बीते तीन सालों से प्रॉपर्टी में हॉट रहे नोएडा एक्सटेंशन के बूम पर ब्रेक लग गया है। हाईकोर्ट के फैसले का असर अगले दिन नोएडा एक्सटेंशन में दिखाई दिया।

आम्रपाली स्मार्ट सिटी और महागुन मायरा में काम रोक दिया गया। महागुन में विला के लिए बेसमेंट का काम चल रहा है। नोएडा से नोएडा एक्सटेंशन के रास्ते पर करीब 150 बुकिंग बूथ बनाए गए हैं। बीते दिनों में यह बुकिंग बूथ गुलजार रहते थे। नोएडा एक्सटेंशन की तरफ जाने वाली सभी गाड़ियों को हाथ देकर अपना ब्रोशर थमाया जाता था।

शुक्रवार को नजारा बदला हुआ था। अचानाक बुकिंग बूथ खाली हो गए। स्मार्ट सिटी पर तंबू उखाड़ दिया गया। महागुन मायरा में बेसमेंट का काम रोक दिया गया है। कंसट्रेक्शन से जुडे लोग मार्केटिंग दफ्तर में बैठे थे। कल तक हॉट नोएडा एक्सटेंशन के बूम को अचानक ब्रेक लग गया। फैसले से बाहर दूसरे प्रोजेक्ट पर भी इसका असर दिखाई दिया।

बुकिंग बूथ सूने थे। उनके निवेशक भी फ्लैट का स्टेट्स जान रहे थे। इटैडा के पास बुकिंग बूथ पर बैठे श्याम ने बताया कि आज कोई बुकिंग कराने वाला नहीं आया। कुछ बड़े बिल्डरों के पास अपने फ्लैट के स्टेट्स को लेकर क्वेरी आई हैं। छोटे बिल्डरों के प्रोजेक्ट पर इस फैसले का बड़ा असर पड़ेगा। पहले ब्याज दरों में हुआ इजाफा और अब हाईकोर्ट का फैसला नोएडा एक्सटेंशन के प्रोपर्टी बूम को ठंड़ा कर देगा।

http://www.livehindustan.com/news/desh/deshlocalnews/article1-story-39-0-171032.html&locatiopnvalue=1

नौएडा जमीन विवादः किसानों को ज्यादा मुआवजा

प्रकाशित Fri, मई 13, 2011 पर 16:30  |  स्रोत : Moneycontrol.com

13 मई 2011

सीएनबीसी आवाज़

उत्तर प्रदेश की सैटेलाईट सिटी नौएडा में जमीन अधिग्रहण को लेकर मचे हंगामें में नौएडा एक्सटेंशन के शाहबेरी गांव की जमीन पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यहां की जमीन आवंटन को रद्द कर दी है। बिल्डरों ने जमीन आवंटन रद्द होने के बाद अब एक बार फिर नोएडा अथॉरिटी से मिलकर नया फॉर्मूला तैयार करना की योजना बनाई हैं।

उत्तर प्रदेश के नोएडा एक्सटेंशन के 156 एकड़ की जमीन पर एनसीआर के 4 बिल्डर सुपरटेक, आम्रपाली, माहगुन और गौर सन्स को जमीन मिली हुई है। आज इन बिल्डरों की नोएडा अथॉरिटी के साथ बैठक हुई।

बताया जा रहा है कि गांव के किसानों को ग्रेटर नोएडा ऑथोरिटी ने मना लिया है और अब किसानों को ज्यादा मुआवजा मिलेगा। इस तरह से बिल्डर की पुरानी डील बरकरार रहेगी जबकि ग्रेटर नोएडा ऑथोरिटी और किसानों के बीच अब नया करार होगा।

किसानों को खुश करने के लिए मुआवजे की रकम के अलावा जमीन भी मिलेगी। जमीन के 6 फीसदी हिस्से के साथ में 3000 वर्ग यार्ड जमीन घर केहर सदस्य के नाम पर दी जाएगी।

शाहबेरी गांव की जमीन आवंटन रद्द होने के बाद सबसे ज्यादा परेशान वो लोग है जिन्होंने यहां चल रहे है प्रोजेक्ट में बुकिंग की थी। लेकिन आम्रपाली डेवलपर्स का कहना है कि लोगों को डरने की कोई जरूरत नहीं है। कंपनी के ईडी शिव प्रिय के मुताबिक कंपनी लोगों को दूसके प्रोजेक्ट में घर देने को तैयार है और लोग पैसे वापस चाहते है तो वो लोग पैसे ले सकते है।

http://hindi.moneycontrol.com/mccode/news/article.php?id=28387

High court strikes down land acquisition in Greater Noida

Greater Noida, May 12 (IANS) The Allahabad High Court Thursday struck down the acquisition of land by the Greater Noida authority in Sahberi village where leading builders Amrapali, Supertech and Mahagun have launched their residential schemes under the name of Noida Extension.

In its order, the high court de-notified the entire land of Sahberi village for not giving the farmers an opportunity to file their protest under section 5 of the Land Acquisition Act (LA Act).

The Greater Noida Authority had on June 10, 2009 notified the village land of Sahberi and later took physical possession of it by entering it in revenue records. It deposited the compensation in the district treasury to be given to farmers whose land was acquired. After formalizing the process of the Land Acquisition Act, the land was allotted to the real estate developers.

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Farmer leader Satya Pal Chaudhary and 20 affected farmers challenged the acquisition process and filed writ petitions before the Allahabad High Court against the ‘arbitrary acquisition’ of land by not giving farmers an opportunity to file their objections. The high court clubbed the 21 cases together and initiated legal proceedings.

After hearing arguments from both sides, the three-judge bench comprising Justice S.N. Mehrotra, Justice Sunil Ambwani and Justice K.N. Pandey set aside the process of acquisition and declared the entire land of Sahberi village as de-notified.

In their judgment, the court observed that the entire process of acquiring the land was illegal. The farmers were not given an opportunity to file their objection, the court said.

‘After the pronouncement of the judgment the entire land of village Sahberi stands de-notified. The parties whether they had gone to the high court or not would be benefitted by the judgment since the court has de-notified the entire stock of land of the village,’ said petitioner and farmer leader Satya Pal Chaudhary.

The ruling comes even as a controversy has erupted over land acquisition in Greater Noida for the 156-km Yamuna Expressway that is to connect Agra with New Delhi.

Farmers demanding more compensation for their acquired land clashed with the police, leaving four people dead in firing last week.

Farmers allege that in villages falling under Noida, Greater Noida and Yamuna Expressway Authority areas, the Mayawati government used the Land Acquisition Act’s provisions to suspend their right to object.

http://www.inewsone.com/2011/05/12/high-court-strikes-down-land-acquisition-in-greater-noida/49969

नोएडा एक्सटेंशन ने दे दी टेंशन

ग्रेनो में मकान बनाने का सपना देख रहे हजारों लोगांे के लिए मुश्किल हो सकती है। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने चार बिल्डरों को जमीन अलॉट की थी। गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिग्रहण प्रक्रिया निरस्त कर दी है। इससे चारांे बिल्डरों के यहां फ्लैटों की बुकिंग कराने वाले हजारों लोग टेंशन में आ गए हैं। अब उनकी निगाहें अथॉरिटी के अगले कदम पर टिक गई हैं।

करीब एक साल पहले चार बिल्डर महागुन , आम्रपाली , सुपरटेक व पंचशील ने नोएडा एक्सटेंशन में शाहबेरी गांव के पास वन , टू , थ्री व फोर बीएचके फ्लैटों की स्कीम लॉन्च की थी। बिल्डरांे ने लोगों को लुभावने व जल्द फ्लैट तैयार कर देने का वादा किया था। हजारों लोगों ने स्कीम पसंद आई और उन्होंने धड़ाधड़ फ्लैटों की बुकिंग करा ली। इनमें से ज्यादातर लोगों ने बैंक व प्राइवेट फाइनेंसर से लोन लेकर फ्लैटों की बुकिंग कराई। जिस जमीन पर ये फ्लैट बनाए जाने थे , उस जमीन के अधिग्रहण के विरोध में शाहबेरी गांव के सैकड़ों किसान हाईकोर्ट चले गए। शाहबेरी गांव के किसान शराफत ने बताया कि प्रशाासन ने ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के लिए यह कर जमीन अधिग्रहण करना शुरू कर दिया कि इस जमीन पर विदेशी कंपनी लगाई जानी है। इससे हजारांे लोगों को रोजगार मिलेगा। लेकिन अथॉरिटी ने अधिग्रहण की कार्रवाई आनन फानन में पूरी करके बिल्डरों को जमीन अलॉट कर दी। किसानों को धारा 5 ए के तहत सुना भी नहीं गया। किसानों को मुआवजा भी 850 रुपये / वर्गमीटर की दर से दिया गया। जबकि अथॉरिटी ने बिल्डरों को किसानों से ली गई जमीन लाभ कमाते हुए 10 हजार 6 25 रुपये में बेच दी। इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच ने इस मामले में गुरुवार को फैसला सुनाया।

——Navbharat times

Land act misused to favour realtors, say Greater Noida farmers

Noida, May 12 (IANS) At the heart of the snowballing controversy over land acquisition in Greater Noida in Uttar Pradesh lies the gross misuse of legal provisions to favour real estate developers, say protesting farmers even as officials pass the buck.

Farmers demanding higher compensation allege that in villages falling under Noida, Greater Noida and Yamuna Expressway Authority areas, the Mayawati government used the Land Acquisition Act’s provisions to suspend their right to object. The 156-km Yamuna Expressway is to link New Delhi with Agra and reduce travel time by an hour.

‘Under the Act, the state can exercise its power to acquire land for public cause,’ said farmer leader Satya Pal Chaudhary.

‘The state has to initiate this through Section 4 under which the details have to be notified in the media. Then, under Section 5, objections are invited from the aggrieved parties and heard judiciously.

‘And after the smooth acquisition of land, Section 9 of the Act is enforced. That means the state has the right to take physical possession. Compensation, whatever is decided, is deposited with the state treasury if a farmer does not come forward to take the compensation amount.

‘The unfortunate part of this Act is the state possesses the right to revoke the provisions of Section 5 (to file objections) under extraordinary emergency situations. The provisions of Section 5 are suspended and Section 17 has been enforced in the entire district. This means, farmers have no right to file objections.

‘The government is misusing the Land Acquisition Act through such provisions and on record such an extraordinary emergency situation has continued for a long time in this area,’ said the farmer leader.

Officials say large scale land acquisition had been carried out under Section 17 and they had gone by the book.

Surendra Ram, additional district magistrate (Land Acquisition) Yamuna Expressway Authority, said: ‘When Section 17 of the Act is enforced, then Section 5 is automatically suspended.

‘Section 17 was already in force in the entire district of Gautam Budh Nagar when I joined as ADM in the Yamuna Expressway Authority,’ he said.

Asked about the urgency to implement Section 17, he passed the buck saying the Expressway Authority would have to be asked about that.

Harnam Singh, the ADM for Gautam Budh Nagar district, under which Greater Noida falls, said the same thing had been done for other projects.

‘All acquisition was executed by revoking Section 5 and enforcing Section 17 in Gautam Budh Nagar district, including for the cement companies of Birla and Ambuja near NTPC in Dadri.’

But S.P. Chaudhary, a leading law expert of revenue related cases, said: ‘Section 17 is enforced under the most extraordinary emergencies to acquire land when a project of public interest comes up. Hence the revocation of Section 5 and enforcement of Section 17 in the entire Gautam Budh Nagar was strange.’

The farmer agitation has already claimed four lives, including of two policemen. and political parties have jumped on to the bandwagon.

The farmers say areas near the expressway will be sold to real estate developers who will make multi-storey buildings for sale at huge prices.

‘In Bhatta-Parsaul, the government has used extraordinary emergency powers and acquired land at the rate of Rs.845 per sq m. The developers then sold the land at the high premium rate of Rs.10,500 per sq m. The end user is getting the floor at Rs.1,600 to Rs.2,200 per sq foot,’ said farmer Kirpal Singh Malik.

‘After calculating the cost of high rise buildings, the sale price is calculated at Rs.2 lakh per sq m. On the one hand, the farmer is given at Rs.845 per square m while the end user is getting the floor at Rs.2 lakh per sq m.

‘The middleman who does not own land is getting benefit approximately at Rs.1 lakh at least, without having any ownership right on land.’

Farmer Raj Pal Malik said: ‘This discriminating policy of the government has caused anger among cultivators.’

The authority, after acquiring the land, allots it to developers on instalment basis that varies from 10 to 29 years. The developers, after getting the allotment letter, sell the entire project at high prices.

Woman farmer leader Rajviri Devi said: ‘The entire policy is pro-realtor and anti-farmer. It is needs be to reversed it urgently.

‘There is no regulatory authority to put a check on such trends in real estate. The man who was cycling 10 years ago is flying in his own helicopter. The farmers are against such discriminatory policies,’ said local farmer Rajendra Singh Malik.

http://www.inewsone.com/2011/05/12/land-act-misused-to-favour-realtors-say-greater-noida-farmers/49900

Noida Extn: HC quashes land acquisition in Sahberi The Allahabad High Court on Thursday quashed the acquisition of land by the Greater Noida Authority at Sahberi village in Gautam Budh Nagar district where three leading builders had launched residential schemes.The builders Amrapali,Supertech and Mahagun had started their residential schemes under the name of Noida Extension.

In its order,the bench comprising Justice Sunil Ambwani and Justice KN Pandey,denotified the entire land of Sahberi village for not giving the farmers an opportunity to file their protest under section 5 of the Land Acquisition Act.

The Greater Noida Authority had on June 10,2009 notified the village land of Sahberi and later took physical possession of it by entering it in revenue records.Farmer leader Satya Pal Chaudhary and 20 affected farmers challenged the acquisition process and filed writ petitions before the Allahabad High Court against the arbitrary acquisition of land by not giving farmers an opportunity to file their objections.

The HC clubbed the 21 cases together and initiated legal proceedings.

CMD of Supertech R.K Arora said that as the possession of the land was not given to them,they did not launch any project there.The court decision will not affect their buyers.

On the other hand,Amrapalis spokesperson said that they had launched one project in the Sahberi village.The company will now shift the buyers to other projects.

MD of Gaursons said that people should not confuse the Sahberi village with the entire Noida Extension.It is only a small portion of the entire development.This will not have any impact on the other projects in the area.

Reference:
Allahabad High Court Judgement on Denoticification of Noida Ext Land at village

नोएडा एक्सटेंशन में जमीन का अधिग्रहण निरस्त

http://navbharattimes.indiatimes.com…ow/8276782.cms

ग्रेटर नोएडा।। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नोएडा एक्सटेंशन के लिए अधिग्रहित
की गई 159 हेक्टेयर जमीन की अधिग्रहण प्रक्रिया निरस्त कर दी है। साथ ही
प्रशासन से पूछा है कि आखिर ऐसी क्या जल्दी थी, जो किसानों का पक्ष सुने
बगैर ही जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई।

इससे बिल्डर्स में हड़कंप मच गया है। इस जमीन पर कई नामी बिल्डर्स के
प्रोजेक्ट हैं। इसमें हजारों लोगों ने फ्लैट बुक कराया हुआ है। बिल्डर्स
ने यहां 8वीं मंजिल तक निर्माण भी करा लिया है।

किसानों की याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस आदेश से ग्रेटर नोएडा
अथॉरिटी को जोरदार झटका लगा है। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने बिसरख एरिया के
आसपास बिल्डर्स स्कीम लॉच की थीं। जमीन अधिग्रहण के लिए 13 जून 2009 को
धारा-4 की कार्रवाई की गई थी। नियम के अनुसार धारा-4 के बाद धारा-5 ए की
कार्रवाई की जाती है। इसमें किसानों का पक्ष सुना जाता है।

किसान अगर अधिग्रहण के खिलाफ आपत्ति लगाते हैं तो उसका समाधान करने के
बाद ही अधिग्रहण प्रक्रिया आगे बढती है। आरोप है कि प्रशासन की रिपोर्ट
पर शासन ने धारा-5 ए के बजाय 13 नवंबर 2009 को सीधे धारा-6 की कार्रवाई
कर डाली।

किसानों ने इसका स्थानीय प्रशासन से विरोध किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं
हुई। उसके बाद साहबेरी गांव के किसान देवेंद्र वर्मा, आले नदी समेत करीब
डेढ़ सौ किसानों ने 28 मार्च 2010 को हाईकोर्ट में गुहार लगाई।

कोर्ट में किसानों ने आरोप लगाया कि औद्योगिक विकास के नाम पर अधिग्रहण
के लिए नोटिफिकेशन किया गया, जबकि जमीन को बिल्डर्स को बेचा गया। इसके
लिए लैंडयूज भी चेंज नहीं किया गया। साथ ही किसानों को 850 रुपये प्रति
वर्ग मीटर की दर मुआवजा दिया गया, जबकि बिल्डर्स को करीब साढे़ दस हजार
रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से बेचा गया।

इस संबंध में हाई कोर्ट ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाया। इलाहाबाद हाई
कोर्ट की कोर्ट नंबर-35 में संयुक्त बेंच के जज सुनील अंबानी व काशीनाथ
ने ग्रेटर नोएडा प्रशासन को इस संबंध में फटकार लगाई।

इससे बिल्डर्स में हडकंप मच गया है। जिस जमीन की अधिग्रहण प्रक्रिया
निरस्त की गई है, उस पर महागुन बिल्डर्स, आम्रपाली, सुपरटेक और पंचशील
बिल्डर्स के प्रोजेक्ट हैं। इन बिल्डरों ने लोगों के फ्लैट बुक भी कर लिए
हैं। इस संबंध में ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के डीसीईओ पी. सी. गुप्ता का
कहना है कि उन्होंने अभी हाई कोर्ट के फैसले की प्रति नहीं मिली है। उसका
अध्ययन करने के बाद आगे की कार्रवाई के संबंध में फैसला लिया जाएगा।

अगर अधिग्रहण प्रक्रिया में माननीय न्यायालय ने कोई कमी पाई है तो
अधिग्रहण प्रक्रिया को दोबारा करेंगे और जरूरत पड़ने पर पुन: याचिका दायर
करेंगे।

क्या करेंगे लोग
– जिन लोगों ने यहां फ्लैट की बुकिंग कराई है, उन्हें आगे चलकर परेशानी
का सामना करना पड़ सकता है।
– वे बुकिंग कैंसल करा सकते हैं, लेकिन बिल्डर फौरन उनका पैसा लौटा
पाएंगे, यह देखना होगा।
– लोग अदालती लड़ाई में अगले मोड़ का इंतजार कर सकते हैं या फिर खुद
अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
– लेकिन इस दौरान लागत बढ़ सकती है। अगर मामला लंबा खिंच गया तो फ्लैट की
डिलीवरी में भी देरी होगी।

Multiple roadblocks for F1 track officials

Navneet Singh/ N Ananthanarayanan, Hindustan Times
Greater Noida, May 12, 2011  Email to Author

First Published: 23:07 IST(12/5/2011)

The fine dust blows everywhere, adding to the misery of the summer
heat as work at the Buddh International Formula One track, where
India’s inaugural grand prix will be held in October, goes on in full
swing. A bunch of policemen guard the main entrance of the sprawling
facility, taking shade under the half-finished Taj expressway that
runs close to the main entrance of F1 track. There is no sign of the
farmers’ agitation that has kept the administration on tenterhooks not
very far away in Greater Noida.

However, the F1 track bosses may still be in for a rude jolt. The
farmers at the nearby villages are upset that their religious
sentiments are not being respected, warning that it could blow into a
major controversy in the near future.

Barely 150 metres from the track stands a decades old peer baba
temple, which has become the bone of contention, as the villagers fear
their popular place of worship could be demolished.

The villagers are already upset because the short route from Gunpura
and Atta villages to the bigger Dhankaur village on the other side has
been cut off because of the track. They are not assured the path to
the temple will be left untouched, and feel a complete cut off is
inevitable.

Temple issue

Head priest Balak Das expressed concern saying the temple land was
originally huge but had now shrunk to just 30 square yards due to
encroachment. Mistrust, says Das, has forced the people of the region
to approach court.

“When all our pleas fell on deaf ears, we had no option but to seek
court intervention,” says Ekta Nagar, pradhan of Gunpura and Atta
villages, from where large tracts of land have been purchased for the
F1 circuit. A former pradhan of Dhankaur Ramesh Nagar said villagers
had held demonstrations in the past after the path to the temple was
briefly cut off.

There is simmering discontent, and if smooth passage from Gunpura
village to the temple is not allowed, says Balak Das, the locals could
revolt. The head priest cannot read or write, but carries a local
court order in his waist pouch.

“Hundreds of devotees throng the temple on Sundays. Hurting the
religious sentiments can turn things ugly. It should be sorted out
amicably,” says Sunder Singh, a resident of Gunpura village.

The other sticking point is opposition to the shifting of the Gunpura
village cremation ground — a few hundred metres from the temple —
situated on land that has been acquired. A dumping ground for animal
carcasses is also within the land acquired for the race circuit.

The villagers have filed a public-interest litigation in the Allahabad
High Court that will come up for hearing on May 18.

However, the F1 circuit boss said the issues would be smoothly
resolved.

“It is a samadhi, not a temple and we fully empathise with the local
people,” Sameer Gaur, MD and CEO, Jaypee Sport International Ltd
(JPSL), told HT.

“We are talking to the people concerned and are confident a solution
would be found,” he said. “Whatever we decide, we will make sure it
does not hurt any feelings.”

Gaur also said there was no issue over the shifting of the cremation
ground and that a majority of the villagers had accepted it.

Things are fine right now, but if things get ugly the Indian

GP on Oct 28-30 may well be in jeopardy. Although Jaypee sources
assure, this will never happen.

Farmers’ agitation: Mayawati govt sold Noida farmlands it didn’t own

Akash Vashishtha  | Greater Noida, May 11, 2011 | Updated 08:46 IST

The farmers of Greater Noida have been agitating for adequate compensation for their lands acquired.

But here’s a shocker. The Yamuna Expressway Development Authority has sold off lands in and around Bhatta Parsol village even before it had acquired them.

Most farmers do not even know that the land which they think is theirs and on which they cultivate has been sold off without their knowledge and consent.

About one-and-a-half years ago, the authority floated a residential scheme under which 21,000 plots of sizes ranging between 300 square metres to 4,000 square metres were allotted, all at one go. The combined area of the plot is said to be greater than the total area of all plots offered by the Greater Noida Authority over the past 20 years.

In fact, most of the allottees have reportedly even deposited the money with the authority and nearly half of them have already executed their lease agreements.

But the shocking part is that the Yamuna Expressway Authority allotted the plots which it did not legally possess. Apart from the authority , more than 1,000 private builders have also been selling plots on which they have no legal possession.

A copy of the layout plan released by the authority reveals that the J-block of the scheme falls entirely in Bhatta Parsol.

All lands in proximity to this area have also been sold in the form of plots by the authority and the private builders. And a huge chunk of them had not been acquired at the time of selling.

“The expressway authority acted for reasons best known to it by plotting agricultural lands which was not at all in its possession. It had neither notified the acquisition of the village lands, nor had reached any agreement or compromise with the villagers. This is a massive cheating,” Brijesh Sharma, a real estate analyst in Greater Noida, said.

“If, for some reason, the allotment gets cancelled now, it would be difficult for the authority to save its face because of the huge money it has collected from the allottees,” he added.

High Court lawyer and Noida resident Amit Khemka said: “The concept of welfare state, as part of which these authorities were created, has been completely forgotten in the name of development. These authorities have turned commercial organisations of late, playing at the hands of private business houses.

“There is no analysis of the policies of the government. In fact, there is no policy at all. There is total ad hoc-ism. Whatever the civil servants think right, they execute it without any control. There is no transparency, no objectivity in their functioning.” Khemka added: “This is nothing but institutionalised cheating. Had this been done by a private company, a case of cheating would have been lodged against it. But since this is the government itself, they can easily manipulate the system. The courts must haul them for cheating,” Khemka said, adding, “Worldwide, there is no trend of habitation along expressways”. The farmers, on the other hand, claimed they had no idea about the alleged fraud played out on them.

Kesar Singh, a resident of Bhatta, who had fled the village following police brutalities, said: “We were only given a blurred picture that they would bring a township, but we did not know till date that they have already done plotting on our lands. The government had even threatened to acquire our lands forcibly if we did not give them up on our own. They have cheated us,” he said.

When contacted, Yamuna Expressway deputy chief executive officer R. K. Singh said he was on leave and out of the town for 10 days. Mohinder Singh, chairman of the authority, did not answer this correspondent’s calls.

http://indiatoday.intoday.in/site/story/mayawati-government-sold-farmland-it-did-not-own/1/137723.html

Reference:

Allahabad-HC–Judgement-Sahberi-Noida-Ext

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